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Monday, January 13, 2014

snow ..only ..snow
uff so much snow
Roming in snowfall ...
मेरा प्यारा राजदुलारा ...११ जनवरी २०१४ को स्टॉकहोममे  बर्फ गिरते हुए मौसम का  लुत्फ़ लेते हुए ...

Thursday, January 9, 2014

स्काईप मे बाबा को देखते ही ...शैतानी ...बाबा ने तो फोटो ही खींच ली ...

Wednesday, January 8, 2014

पापा के साथ आतिश बाजी देखते हुए .....स्टॉकहोम मे .....नए साल मे ...
स्टॉकहोम स्वीडन मे .....राम रमैया ......राम रमैया ........राम रमैया ....होहू तात् बल सील निधाना ....अजर अमर गुननिधि सुत होहू ......करहु बहुतरघुनाय छोहू ......*राम **श्री राम **जय श्री राम ** ...... शोपिंग करते ही मेरा लाल ...

Monday, January 6, 2014

HaPPy New Year ..2014 ...

नई भोर -सी
दमकाती है मन
याद तुम्हारी
पल -पल है प्यारी
मुग्ध कली- सी
महकाती है मन
याद तुम्हारी
ज्यों सुरभि की झारी
प्यार पगी -सी
सरसाती है मन
याद तुम्हारी..
मेरा शेर ...शेर से ही खेले ..
स्काइप मे अद्वय की तस्वीर ली .....शैतानी के पूरे मूड मे ..
स्काईप मे बात करते समय ...अद्वय बेटे की फोटो ली ...मस्ती मे सोया हुआ ......बजरंग बली सदैव रक्षा करना ..
मन भीगा रहता है मेरा
प्रेम की गंगा यमुना सा
कभी तुम कृष्ण बन जाते,
कभी राम, या सोन चिरैया !
तेरी मुस्कान है अजोड
जग में नहीं, इसका तोड़
दूध, मिठाई, ,नए नए पकवान
फल, मीठे और रसीले,
अब मै किसे खिलाऊं ,
चाव भरी, अपने हाथों से मैं
अब मीठी नींद किसे सुलाऊं
अब कौन बाल पकडे ...कौन अब मुहं मुँह नोचे
किसे बुलाऊं प्यारा रमैया ....सोन चिरैया .Really I miss U

ठुमक चलत राम रमैया करत किलकारियां ..

किलकि किलकि उठत धाय

गिरत भूमि लटपटाय .
धाय मात गोद लेत
मुकुंद की रनियां ...

सबसे प्यारा मेरा अद्वय ..


प्यारे अद्वय का प्रथम जन्म दिन स्वीडन में धूम से मनाया गया . अद्वय ने केक काटा .
तुम जियो हज़ारों साल ,साल के दिन हो पचास हज़ार
Happy Happy Birthday .


30 november 2013 ..बहुत दिनों पर देखा तुमको मेरे प्यारे बेटे ,

दौड़ दौड़ कर तुम चलते हो ,अब ना रहते लेटे |

पैंया पैंया दौड़ लगाते ,कितना अच्छा लगता,

छोटा सा मेरा अद्वय बेटा, भागा भागा चलता |

सात समुन्दर पार है बेटा ,जन्म दिवस जब आया,

देख के तुमको कम्प्यूटर पर अपना मन बहलाया |

मन कहता जल्दी से मिलकर तुमको खूब खिलाऊँ,

सारी दुनिया की खुशियों को तुम पर आज लुटाऊँ |

18 november 2013 ....आज मेरे पौत्र अद्वय का हिंदी तिथि अनुसार जन्म दिन है . उसके लिए कुछ उद्गार -

जन्मदिन आए बारंबार तारों से चमको जग में, तुम्हे मिले स्नेह अपार |

सफलता पाँव पखारे सदा, साथ हो स्वास्थ्य और संपदा, करे कृपा करतार जन्मदिन आए बारंबार ||

खुशियों से भरी झोली हो, फिर भी कोयल सी बोली हो, झरे वसंत बहार जन्मदिन आए बारंबार |

अपनों के संग सब मेले हों, सच सपने सब अलबेले हों, किस्मत करे श्रृंगार जन्मदिन आए बारंबार ||

बुआ का गप्पा ....
मेरा प्यारा सोन चिरैया ....

आज मुझे अद्वय की सुधि आई ।

आगे आगे अद्वय चलत हैं ।
पीछे उनकी माई ।
तिनके पीछे चलत है मुकुंदा ।
बिपत कही ना जाई ॥

बिनाबहुरिया मोरी सूनी रसोई ।
पूत बिन ठकुराई ।
अद्वय बिना मोरी सूनी अयोध्या ।
महल उदासी छाई ॥ ..

साइकिल मे सवार मेरा राजदुलारा .
अटकन - बटकन,
दहिया चटकन,
दादी लाई ,
खीर - मलाई ,
मुसवा मोटा ,
रुपिया खोटा,
माला टूटी ,
किस्मत फूटी ,
गोल बताशे ,
खेल -तमाशे,
खा लो चमचम ,
हरहर बमबम .

कार चली भई कार चली,

अद्वय जी की कार चली |

जगह नहीं अन्दर मिल पाई,

बैठे कार के ऊपर |

रेस सभी से कर सकते हैं ,

सबके आगे जाकर||

गाना सुनते ,हवा हैं खाते

जल्दी जल्दी भागे जाते|

मिला सड़क पर ट्रैफिक वाला,

अद्वय का उससे पड़ा पाला |

अद्वय ने आई कार्ड दिखाया,

पुलिस मैन ने पूंछ दबाया|

पूंछ दबा कर मार सलामी,

भगा सिपाही गिरा पजामी ||

आते नहीं कबूतर हैं अब ,जब होता है भोर |

चला गया है दूर मेरा एक लाल ,मेरा चित चोर.||

बाल हो गए बड़े हमारे ,नहीं खींचता कोई|

विदा तुम्हे करके सबकी आँखे हैं कितनी रोई ||

खुश तुम रहना मेरे बेटे ,खूब उछलना खूब कूदना |

जल्दी जल्दी भागे भागे पूरे घर में दौड़ लगाना ||

हंसना और हंसाना सबको मेरे प्यारे भैया|

सुन कर हँसी तुम्हारी ,खुश होजाए सारी दुनिया ||

हनुमान जी साथ हैं तेरे ,तुझको खूब बढायेंगे|

विश्व जीत कर तुम आओगे ,हम ये रोज मनाएंगे ||

तुम्हे देखते ही बरस पड़ती है आँखे ...सभी का दुलारा ..प्यारा नटखट मेरा अद्वय....
मेरा प्यारा ..अद्वय ..विदेश जाने से पहले ..देशी सवारी का लुत्फ़ लेते हुए .....
क्या लिखूं ....मेरे प्यारे ..
राजदुलारे ...सोन चिरैया ..
प्यारे अद्वय ...मेरे राम रमैया ..
सोच .सोच के आँखें मेरी यूं भरतीं ?
कित्ती दूर..चले जाओगे ...
खूब देखती, तुम्हें प्रेमवश
और सोच सोच के बस ..सोचती ही रह जाती
कैसे समझाऊँ अपने मन को मै..
मेरा अद्वय तो रहेगा मेरे मन मे ,,,

मोहल्ले मे सभी का लाडला मेरा राजदुलारा अद्वय .. अपनी फ्रेंड मेहरीन से मिलते हुए .
स्वीडन में घूमते हुए......
Advay joins office in Sweden.
का करे रे अजिया ....

ढूंढे री अँखियाँ उसे चहुँ और
जाने कहाँ छुप गया मेरा चित चोर
उड़ गया ऐसे जैसे पुरवैया..
का करे तेरी अजिया ...

मेरा सोन चिरैया ..फ्लाईट मे सोते हुए ...
मेरा सोन चिरैया ...अद्वय ..स्वीडन जाने से पहले ...सभी से मिलते हुए ..
मेरे जीवन का तू एक ही सपना
जो कोई देखे तोहे समझे वो अपना
सब का है प्यारा, मेरा रमैया
का करे तेरी अजिया

Sunday, January 5, 2014

जय जय श्री राम ....
अजर अमर गुननिधि सुत होहू ....करहु बहुत रघुनायक छोहू

रिश्तों में एक रिश्ता
दादा और पोते का रिश्ता
ये बड़ा ही खास होता है ।
ये रिश्ता क्या होता है,
ये तो केवल एक एहसास होता है।
ये रिश्ता केवल इस लिए नेक होता है,
क्यों की बुढ़ापा और बचपन दोनों ही एक होता है।
पोते के साथ दादा ऐसा लगता है
जैसे एक छोटे से पौधे के
ऊपर आसमान का दोशाला है ।
दादा और पोते के रिश्तों के बिना
रिश्तों की अधूरी वर्णमाला है।
पोता कंधे पर चढ़ कर बोलता है
कि दादा मैं तो आप से भी बड़ा हो गया।
और दादा कहता है कि इन कंधों पर घूम के बेटा बड़े हो जाओगे ,
तभी तो मेरी अर्थी को एक दिन कांधा लगाओगे ।

आओ अद्वय ...तुम्हे कविता सुनाएँ ..
मोटू सेठ सड़क पर लेट
गाड़ी आई फट गया पेट
गाड़ी का नम्बर ट्वेन्टी एट (२८)
गाडी पहुँची इंडिया गेट
इंडिया गेट पर दो सिपाही
मोटू मल की करी पिटाई।

निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल
बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल ।
अंग्रेजी पढ़ि के जदपि, सब गुन होत प्रवीन
पै निज भाषा-ज्ञान बिन, रहत हीन के हीन ।
उन्नति पूरी है तबहिं जब घर उन्नति होय
निज शरीर उन्नति किये, रहत मूढ़ सब कोय ।
निज भाषा उन्नति बिना, कबहुं न ह्यैहैं सोय
लाख उपाय अनेक यों भले करे किन कोय ।
इक भाषा इक जीव इक मति सब घर के लोग
तबै बनत है सबन सों, मिटत मूढ़ता सोग ।
और एक अति लाभ यह, या में प्रगट लखात
निज भाषा में कीजिए, जो विद्या की बात ।
तेहि सुनि पावै लाभ सब, बात सुनै जो कोय
यह गुन भाषा और महं, कबहूं नाहीं होय ।
विविध कला शिक्षा अमित, ज्ञान अनेक प्रकार
सब देसन से लै करहू, भाषा माहि प्रचार ।
भारत में सब भिन्न अति, ताहीं सों उत्पात
विविध देस मतहू विविध, भाषा विविध लखात ।
सब मिल तासों छांड़ि कै, दूजे और उपाय
उन्नति भाषा की करहु, अहो भ्रातगन आय ।

पापा के साथ झूला झूले ....
अद्वय पूछे काली काली कोयल से ...
कोयल इतना भेद बता दो यह अपनी मीठी बोली

जिसे सुना कर तुमने सारे आमों में मिश्री घोली

यह मिठास तुमने अपनी अम्माँ से ही पाई होगी

दादी ने ही मीठी-मीठी बोली सिखलाई होगी..

मसनद का घोडा
घोडे की दुम को खींचा पकड़ के
दौडा दौडा दौडा घोडा दुम उठा के दौडा..
हा हा हा ..अद्वय का घोडा ..
मस्ती मे बैठा मेरा नन्हा मुन्ना ..

मोर पंख लगा के.....आ गए मेरे किशन कन्हैया .....
मेरा अद्वय लेटा बड़ी शान मे
बुआ के पलने मे ..

झूले /झूले रे .....रमैया झूले ..बुआ के पलने मे ..
 

मनी लाई पलना बड़ी दूर से ...
मेरा रमैया झूले ..लल्ला लेते पलना मे ..
बुआ झुलावें ..मन ही मन हर्षित होवे ..
झूले झूले रे ..कन्हैया ...

आया .रे ..आया ..बदमाशों का सरदार .....
नाना जी के घर में आये तीन तीन बदमाश |
देख देख शैतानी उनकी, अटकी नानीजी की साँस ||
एक रोये ,एक भागे और एक तोड़े उनका फोन |
टूटा फोन देख कर नानाजी हो गए हैं मौन ||
नाना जी हैं दौड़े भागे ,अपने मंदिर को वो बचाते |
पर बच्चे ना पीछा छोड़े,उनको सारे नाच नचाते ||
मन भीगा रहता है मेरा
प्रेम की गंगा यमुना सा
कभी तुम कृष्ण बन जाते,
कभी राम, या सोन चिरैया !
तेरी मुस्कान है अजोड
जग में नहीं, इसका तोड़
दूध, मिठाई, ,नए नए पकवान
फल, मीठे और रसीले,
जो तुम्हें खिलाती हूँ, मैं,
चाव भरी, अपने हाथों से मैं
जब् मीठी नींद सुलाती हूँ,
कभी बाल पकडे ...कभी मुँह नोचे
फिर सो जाता है मेरा प्यारा रमैया ....सोन चिरैया ..