Advay Dikshit

Advay Dikshit

Thursday, January 2, 2014

मेरा अद्वय बहुत शैतान, बना है हम सब की ये जान |
ज़रा सा सोकर फिर ये जागा ,पूरे घर में भागा भागा ||
थोड़ा थोड़ा खाना चखता ,दूध इसे ना अच्छा लगता |
खा कर मीठा मीठा आम ,करने ना देता कुछ काम ||
दादी पूजा ना कर पाती ,ना ले पायें 'टैबलेट '|
दिन में सोने को ललचायें ,पर ना पायें लेट ||
लैप टाप ना लेने देता ,ऊपर नीचे बटन दबाए |
अपनी छोटी बदमासी से सबके मन को भाये ||

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