Advay Dikshit

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Monday, January 6, 2014

आज मुझे अद्वय की सुधि आई ।

आगे आगे अद्वय चलत हैं ।
पीछे उनकी माई ।
तिनके पीछे चलत है मुकुंदा ।
बिपत कही ना जाई ॥

बिनाबहुरिया मोरी सूनी रसोई ।
पूत बिन ठकुराई ।
अद्वय बिना मोरी सूनी अयोध्या ।
महल उदासी छाई ॥ ..

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