Advay Dikshit

Advay Dikshit

Monday, January 6, 2014

का करे रे अजिया ....

ढूंढे री अँखियाँ उसे चहुँ और
जाने कहाँ छुप गया मेरा चित चोर
उड़ गया ऐसे जैसे पुरवैया..
का करे तेरी अजिया ...

No comments:

Post a Comment