Advay Dikshit

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Monday, January 6, 2014

आते नहीं कबूतर हैं अब ,जब होता है भोर |

चला गया है दूर मेरा एक लाल ,मेरा चित चोर.||

बाल हो गए बड़े हमारे ,नहीं खींचता कोई|

विदा तुम्हे करके सबकी आँखे हैं कितनी रोई ||

खुश तुम रहना मेरे बेटे ,खूब उछलना खूब कूदना |

जल्दी जल्दी भागे भागे पूरे घर में दौड़ लगाना ||

हंसना और हंसाना सबको मेरे प्यारे भैया|

सुन कर हँसी तुम्हारी ,खुश होजाए सारी दुनिया ||

हनुमान जी साथ हैं तेरे ,तुझको खूब बढायेंगे|

विश्व जीत कर तुम आओगे ,हम ये रोज मनाएंगे ||

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