Advay Dikshit

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Saturday, January 4, 2014

क्या सोचे मेरा रमैया ....बता जरा ..दादी को ..
रमैया बोला ...
बाबा आज देल छे आए

बाबा आज देल छे आए,
चिज्जी-पिज्जी कुछ न लाए!
बाबा क्यों नहीं चिज्जी लाए,
इतनी देली छे क्यों आए?
कां है मेला बाला खिलौना,
कलाकंद, लद्दू का दोना,
चूं-चूं करने वाली चिलिया
चींचीं करने वाली गुलिया.
चावल खाने वाली कहिया,
चुनिया, मुनिया, मुन्ना भैया
मेला मुन्ना, मेली गैया,
कां मेले मुन्ना का गैया
बाबा तुम औ कां से आए
आं..आं.. चिज्जी क्यों न लाए?

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