मन भीगा रहता है मेरा
प्रेम की गंगा यमुना सा
कभी तुम कृष्ण बन जाते,
कभी राम, या सोन चिरैया !
तेरी मुस्कान है अजोड
जग में नहीं, इसका तोड़
दूध, मिठाई, ,नए नए पकवान
फल, मीठे और रसीले,
अब मै किसे खिलाऊं ,
चाव भरी, अपने हाथों से मैं
अब मीठी नींद किसे सुलाऊं
अब कौन बाल पकडे ...कौन अब मुहं मुँह नोचे
किसे बुलाऊं प्यारा रमैया ....सोन चिरैया .Really I miss U
प्रेम की गंगा यमुना सा
कभी तुम कृष्ण बन जाते,
कभी राम, या सोन चिरैया !
तेरी मुस्कान है अजोड
जग में नहीं, इसका तोड़
दूध, मिठाई, ,नए नए पकवान
फल, मीठे और रसीले,
अब मै किसे खिलाऊं ,
चाव भरी, अपने हाथों से मैं
अब मीठी नींद किसे सुलाऊं
अब कौन बाल पकडे ...कौन अब मुहं मुँह नोचे
किसे बुलाऊं प्यारा रमैया ....सोन चिरैया .Really I miss U

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