अद्वय की शैतानी देखो ,
देखो प्यारी सी मुस्कान |
बड़ी बड़ी हैं आँखे इसकी ,
और बड़े हैं इसके कान ||
दिन भर है ये खेल खिलाता ,
सबका है ये मेल कराता |
उछल कूद करते करते ये ,
पूरे घर में दौड़ लगाता ||
जय माता दी, ये करता है ,
रोज सुबह ये जब जगता |
फिर ये खूब नहा दादी संग ,
मंदिर जाता चलता चलता ||
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