Advay Dikshit

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Sunday, January 5, 2014

किए दूध के कुल्ले ... चूस अगूँठा सुधा पिया

किलकारी कल्लोल मचा कर सूना घर आबाद किया

रोना और मचल जाना भी क्या आनंद दिखाते थे

बड़े-बड़े मोती-से आँसू जयमाला पहनाते थे

जब रोये काम छोड़ भागूं औ इसे उठा लिया

झाड़ पोंछ कर चूम-चूम गीले बालों को सुखा दिया...
मेरा दुलारा रमैया .अद्वय ..

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