किए दूध के कुल्ले ... चूस अगूँठा सुधा पिया
किलकारी कल्लोल मचा कर सूना घर आबाद किया
रोना और मचल जाना भी क्या आनंद दिखाते थे
बड़े-बड़े मोती-से आँसू जयमाला पहनाते थे
जब रोये काम छोड़ भागूं औ इसे उठा लिया
झाड़ पोंछ कर चूम-चूम गीले बालों को सुखा दिया...
मेरा दुलारा रमैया .अद्वय ..
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