Advay Dikshit

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Thursday, January 2, 2014

फूलों जैसे कोमल मन के
तितली जैसा चंचल हूँ ,
मै अद्वय प्यारा .प्यारा
सदा ह्रदय से निर्मल हूँ .

होंठों पर मुस्कान सजाये
उछल-कूद हम करते हैं ,
अपनी मीठी बोली से
सबका मन हर लेते हैं .

दादा के हम राज दुलारे
दादी के भी प्यारे हैं ,
मुझे ही तो सच करने
अब उनके सपने सारे हैं

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