Advay Dikshit

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Sunday, January 5, 2014

पर दादी बिना तुम्हारेस्वीडन में मैं कैसे रह पाऊँगा

दिन भर घूमूँगा इधर उधर लौट कहाँ पर आऊँगा

किससे लूँगा पैसे, रूठूँगा तो कौन मना लेगा

कौन प्यार से बिठा गोद में मनचाही चीजें देगा

कौन कहानी सुना रात को अपने पास सुलाएगा

गरम-गरम फिर कौन सवेरे ताजा दूध पिलाएगा

माँ के बिना.. राम ...इतने दिन कैसे रह पाए वन में

अपनी माँ की याद न उनको क्या आती होगी वन में....

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