Advay Dikshit

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Thursday, January 2, 2014

इस दुनिया में मुझको
सबसे अच्छे लगते फूल !
इनके बीच बैठकर मैं
सब कुछ जाता हूँ भूल !
इनकी कोमल पंखुड़ियों पर
सदा ख़ुशी मुस्काती !
मुस्कानों की निश्छल आभा
मेरे मन को भाती !
इन्हें देख मधुकर की बोली
मधुरस से भर जाए !
मीठे-मीठे मधुर तराने
वह गुंजन कर गाए !

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