Advay Dikshit

Advay Dikshit

Friday, January 3, 2014

अद्वय मेरा गया है स्वीडन ,
उसके बिन घर कितना सूना |
दिन भर खेले, दिन भर भागे,
देख के उसको, सपने जागे |
सदा ही हंसना औ`मुस्कराना ,
खुश रह कर सबको खुश करना |
रहो कहीं तुम, पास हो मेरे,
सदा ही रहना हम को घेरे |

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