Advay Dikshit

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Thursday, January 2, 2014

मुट्ठी
एक अंगूठा,
उंगली चार,
मिल गए तो
पंजा तैयार.
पंजा बंद,
बन गई मुट्ठी.
कर देगी अब
सबकी छुट्टी.

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