अले ..अद्वय ...केला खाके मुँह बिचकाया ...
हाहा ...यह कविता पढ़ो ..औए अद्वय को सुनाओ जरा ..
लालाजी ने केला खाया
केला खाकर मुंह बिचकाया।
मुंह बिचकाकर तोंद फुलाई
तोंद फुलाकर छड़ी उठाई।
छड़ी उठाकर कदम बढ़ाया
कदम के नीचे छिलका आया ।
लालाजी गिरे धड़ाम से
अद्वय ने बजाई ताली।
ताली बजी भई ताली बजी , अद्वय जी की ताली बजी .
ReplyDeleteदादा के संग संग तली बजी .
Deletebahut sundar kavita ....aur dada -dadi ka pyar ....
ReplyDeleteउपासना जी ...बहुत बहुत धन्यवाद
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